Monday, September 6, 2010

सरफ़रोशी की तमन्ना (Sarfaroshi ki Tamanna) - बिस्मिल अज़ीमाबादी ( Bismil Azimabadi )

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है

ऐ वतन, करता नहीं क्यूँ दूसरी कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत, मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चरचा ग़ैर की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

वक़्त आने पर बता देंगे तुझे, ए आसमान,
हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है
खेँच कर लाई है सब को क़त्ल होने की उमीद,
आशिकों का आज जमघट कूचा-ए-क़ातिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

है लिए हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर,
और हम तैयार हैं सीना लिए अपना इधर.
ख़ून से खेलेंगे होली अगर वतन मुश्क़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

हाथ, जिन में है जूनून, कटते नही तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से.
और भड़केगा जो शोला सा हमारे दिल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

हम तो घर से ही थे निकले बाँधकर सर पर कफ़न,
जाँ हथेली पर लिए लो बढ चले हैं ये कदम.
ज़िंदगी तो अपनी मॆहमाँ मौत की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

यूँ खड़ा मक़्तल में क़ातिल कह रहा है बार-बार,
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?
दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब,
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको न आज.
दूर रह पाए जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमे न हो ख़ून-ए-जुनून
क्या लड़े तूफ़ान से जो कश्ती-ए-साहिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में

19 comments:

  1. Written by बिस्मिल अज़ीमाबादी (Wrongly cited for Ram Prasad Bismil)

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  2. sarfaroshi ki tammna ab humare dil mein hai

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  3. सर फ़रोशाने वतन फिर देखलो मकतल में है ।
    मुल्क पर कुर्बान हो जाने के अरमां दिल में हैं ।।
    तेरा है जालिम की यारों और गला मजलूम का ।
    देख लेंगे हौसला कितना दिले कातिल में है ।।
    शोरे महशर बावपा है मार का है धूम का ।
    बलबले जोशे शहादत हर रगे बिस्मिल में है ।।

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    1. सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

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    2. सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

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    3. Wah Ajinkya
      Is this part of original?

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  4. uth jaye gar KADAM is martaba ruk na paye,
    Kashmir ko chhorkar PAK Lahore-Lahore chillaye.

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  5. MY HEART IS MY DESH ,HOW CAN I LIVES WITHOUT HEART

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  6. DESH IS MY HEART,, HOW CAN I LIVES WITHOUT HEART

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  7. वक़्त आने पर बता देंगे तुझे, ए आसमान,
    हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है
    खेँच कर लाई है सब को क़त्ल होने की उमीद,
    आशिकों का आज जमघट कूचा-ए-क़ातिल में है
    सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

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  8. When ever I repeat "Rang de basanti" It is certain I will repeat this poem thrice or more....Really love and this poem...jai hind..:)

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  9. salute....to all our freedom heros

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  10. Sooran so o janiye jo lade Deen k haeth,,,
    Purja purja katt marai Kab hu na chhaade khaeth...

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